हडप्पा /सिन्धु सभ्यता
☺हडप्पा सभ्यता का काल समय - 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू.।
☺हडप्पा के लोगों की सामाजिक पद्धति थी - उचित समतावादी
☺जिस पदार्थ का उपयोग हडप्पा सभ्यता की मुद्रा निर्माण में हुआ - सेलखड़ी
☺हडप्पा सभ्यता के निवासी शहरी थे
☺उनका मुख्य व्यवसाय व्यापार था
☺घर का निर्माण ईंटों द्वारा किया जाता था
☺हडप्पा के लोग कपास के उत्पादन में सर्वप्रथम थे
☺प्रमुख बन्दरगाह का नाम -लोथल
☺हल से जोते गए खेतों के साक्ष्य कालीबंगा से मिलते हैं
☺मोहनजोदड़ो सिंध में स्थित है
☺मोहनजोदड़ो में एक वृहत स्नानागार मिला है जो मोहनजोदड़ो की सबसे बडी उपलब्धि है
☺हडप्पा कालीन समाज के वर्ग थे- विद्वान, योद्धा, व्यापारी, श्रमिक
☺घोडे के अवशेष "सुरकोतदा" से मिले हैं
☺सिन्धु घाटी स्थल "कालीबंगन" राजस्थान में है
☺सिन्धु घाटी सभ्यता की समकालीन सभ्यताएं - मिश्र की सभ्यता, मेसोपोटामिया की सभ्यता, चीन की सभ्यता
☺सिन्धु सभ्यता के लोग नाप तौल से परिचित थे इसका प्रमाण लोथल की खोज के दौरान मिलता है
☺हडप्पा सभ्यता का सर्वप्रथम खोजकर्ता - दयाराम साहनी 1921 में
☺हडप्पा सभ्यता कांस्ययुगीन थी
☺हडप्पा कालीन स्थल लोथल गुजरात (भारत) में है☺हडप्पा के लोगों की सामाजिक पद्धति थी - उचित समतावादी
☺जिस पदार्थ का उपयोग हडप्पा सभ्यता की मुद्रा निर्माण में हुआ - सेलखड़ी
☺हडप्पा सभ्यता के निवासी शहरी थे
☺उनका मुख्य व्यवसाय व्यापार था
☺घर का निर्माण ईंटों द्वारा किया जाता था
☺हडप्पा के लोग कपास के उत्पादन में सर्वप्रथम थे
☺प्रमुख बन्दरगाह का नाम -लोथल
☺हल से जोते गए खेतों के साक्ष्य कालीबंगा से मिलते हैं
☺मोहनजोदड़ो सिंध में स्थित है
☺मोहनजोदड़ो में एक वृहत स्नानागार मिला है जो मोहनजोदड़ो की सबसे बडी उपलब्धि है
☺हडप्पा कालीन समाज के वर्ग थे- विद्वान, योद्धा, व्यापारी, श्रमिक
☺घोडे के अवशेष "सुरकोतदा" से मिले हैं
☺सिन्धु घाटी स्थल "कालीबंगन" राजस्थान में है
☺सिन्धु घाटी सभ्यता की समकालीन सभ्यताएं - मिश्र की सभ्यता, मेसोपोटामिया की सभ्यता, चीन की सभ्यता
☺सिन्धु सभ्यता के लोग नाप तौल से परिचित थे इसका प्रमाण लोथल की खोज के दौरान मिलता है
☺हडप्पा सभ्यता का सर्वप्रथम खोजकर्ता - दयाराम साहनी 1921 में
☺हडप्पा सभ्यता कांस्ययुगीन थी
☺मोहनजोदड़ो से मिले पशुपति शिव या आद्य शिव मुहर में व्याघ्र एवं हाथी , गेंडा एवं भैंसा तथा हिरण का अंकन मिलता है
☺हडप्पा से "पुजारी की प्रस्तर मूर्ति " प्राप्त हुई है
☺सिन्धु सभ्यता के बन्दरगाह नगर - लोथल, सुत्कागेंडर,अल्लाहदीनो, बालाकोट, कुनतासी
☺तांबे का रथ "दैमाबाद" से प्राप्त हुआ है
☺सिन्धु सभ्यता का स्थल "देहमोरासीघुंडई" अफगानिस्तान में है
☺सिन्धु क्षेत्र में उत्पादित कपास को यूनानी लोगों ने "सिन्डन" कह कर सम्बोधित किया
☺हडप्पा के लोग सोना चाँदी, तांबा कांसा, टिन व सीसा से परिचित थे
☺हडप्पा के लोग लोहा धातु से अपरिचित थे
☺हडप्पा के लोगों द्वारा उत्पादित फसलें - जौ, चावल और गेहूँ
☺सिन्धु सभ्यता में प्राप्त पशुओं के अवशेष - घोडा , गाय , हाथी
☺हडप्पाकालीन स्थल रोपड या पंजाब सतलुज नदी के किनारे बसा है
☺"मांडा" चेनाब नदी के किनारे अवस्थित है
☺नगरों में नालियों की उचित व्यवस्था थी
☺हडप्पाकालीन सभ्यता में "मातृदेवी" की उपासना की जाती थी
☺व्यापार व वाणिज्य उन्नत दशा में था
☺हडप्पाकालीन लोगों ने नगरों मे घरों के विन्यास हेतु "ग्रीड पद्धति" अपनाई थी
☺"रंगपुर" जहाँ हडप्पा की समकालीन सभ्यता थी सौराष्ट्र में है
☺मिट्टी के बर्तनों पर लाल रंगो का उपयोग होता था
☺सिन्धु सभ्यता का प्रसिद्ध स्थल "लोथल" भारत मे है
☺सिन्धु सभ्यता का युग "आद्य ऐतिहासिक काल" कहलाता है
☺मोहनजोदड़ो का अर्थ होता है - मृतकों का टीला
☺सिन्धु घाटी सभ्यता अपने "नगर नियोजन" के लिए जानी जाती है
☺हडप्पा एवं मोहनजोदड़ो की पुरातात्विक खुदाई के प्रभारी थे - सर जान मार्शल
☺मोहनजोदड़ो से " नृत्य मुद्रा वाली स्त्री की कांस्य मूर्ति " प्राप्त हुई है
☺स्वतंत्र्योत्तर भारत मे सबसे अधिक संख्या में हडप्पाकालीन स्थलों की खोज गुजरात प्रांत में हुई है
☺हडप्पावासी भवन निर्माण की सामग्री (लाजवर्द) हिन्दुकुश क्षेत्र के बदख्शाँ से आयात करते थे
☺सिन्धु घाटी के लोग मातृशक्ति में विश्वास करते थे
☺मोहनजोदड़ो सिन्ध में स्थित है
☺हडप्पावासी देवी और देवताओं दोनों की पूजा करते थे
☺सिन्धु घाटी सभ्यता पंजाब, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, सिन्ध एवं बलूचिस्तान तक विस्तृत थी
☺हडप्पा सभ्यता के सम्पूर्ण क्षेत्र त्रिभुजाकार था।
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