बाल मनोविज्ञान: शिक्षण प्रणालियाँ/पद्धतियां

1) किण्डरगार्टन प्रणाली:

इस प्रणाली का आविष्कार जर्मनी के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री फ्रोबेल ने किया था ।फ्रोबेल के अनुसार ,' विद्यालय एक बाग के समान है जिसमें शिक्षक का स्थान एक माली के समान और बच्चे किण्डर यानी पौधे के समान हैं।' सन् 1937 ई. में फ्रोबेल ने एक स्कूल खोला जिसका नाम किण्डरगार्टन रखा। उन्होंने खेल द्वारा शिक्षा एवं स्वतः क्रिया द्वारा शिक्षा के सिद्धांत पर बल दिया। फ्रोबेल की यह प्रणाली चार से आठ वर्ष के बच्चों के लिए उपयुक्त प्रणाली है, जिसमें बच्चों को आत्माभिव्यक्ति के अवसर प्रदान किए जाते हैं।

2) मान्टेसरी प्रणाली: 

इटली की शिक्षाशास्त्री डा. मेरिया मान्टेसरी को इस प्रणाली का जन्मदाता कहा जाता है। यह प्रणाली 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए उपयुक्त होती है।मान्टेसरी शिक्षा प्रणाली में सर्वप्रथम बालकों के हाथों, पैरों ,वाणी आदि को प्रशिक्षित व दृढ़ किया जाता है तथा हर इन्द्रिय से सम्बन्धित कार्यों से उन्हें अवगत कराया जाता है।। अक्षरों के कटे हुए ब्लाक्स के माध्यम से लेखन का ज्ञान कराया जाता है साथ ही अक्षर ध्वनियों का भी लिंग्वाफोन के माध्यम से ज्ञान दिया जाता है।

3) प्रोजेक्ट प्रणाली:

इस प्रणाली के प्रवर्तक किल पैट्रिक हैं। इनके अनुसार,' प्रोजेक्ट वह उद्देश्यपूर्ण कार्य है जो पूर्ण संलग्नता से सामाजिक वातावरण में किया जाए। प्रोजेक्ट एक समस्यामूलक कार्य है जो अपनी स्वभाविक परिस्थितियों के अन्तर्गत पूर्णता को प्राप्त करता है।'

इस प्रणाली की 6 अवस्थाएं होती हैं - परिस्थिति उत्पन्न करना, प्रोजेक्ट का चयन,प्रोजेक्ट कार्यन्वयन का कार्यक्रम बनाना, बनाए गए कार्यक्रम को व्यावहारिक रूप देना, कार्य का निर्णय और कार्य का विवरण लिखना।

प्रोजेक्ट प्रणाली के माध्यम से विभिन्न विषयों जैसे इतिहास, भूगोल, भाषा, भ्रमण अंकगणित आदि की शिक्षा प्रदान की जाती है।

4) खेल प्रणाली:

 इस पद्धति के प्रवर्तक हेनरी काल्डवेल कुक हैं। इन्होंने अपनी पुस्तक PLAY WAY में इसकी उपयोगिता अंग्रेजी शिक्षण हेतु बताई है। जब बच्चा इस प्रणाली के द्वारा शिक्षण में रुचि लेने लगता है तो उसके लिए यह शिक्षण न रहकर एक खेल की तरह हो जाता है। इस शिक्षण प्रणाली में कक्षा स्तर के आधार पर शिक्षण विधि को तीन वर्ग में बाँटा गया है।

1- प्राथमिक कक्षाएं- इसमें क्रियात्मक शब्दों का खेल सिखाया जाता है जैसे शब्द भण्डार की वृद्धि हेतु बडा सा शब्द देकर उसके प्रत्येक अक्षर से पृथक शब्द बनाने को कहा जाता है या रिक्त स्थानों की पूर्ति में संज्ञा या क्रियाएं भराई जाती हैं।

2-माध्यमिक कक्षाएं- इसमें चित्र के आधार पर कहानी बनाने को कहा जाता है, किसी घटना का वर्णन या डायरी लिखवाई जाती है।

3-उच्च कक्षाएं- इसमें कहानियों का संवाद करवाना, मौलिक कविता या कहानियां लिखवाना आदि शामिल होता है।

5)डाल्टन पद्धति:

इस पद्धति का प्रयोग सर्वप्रथम डाल्टन नगर में कु. हेलन पार्कहर्स्ट द्वारा किया गया था।इस पद्धति में समय चक्र आदि का कोई बन्धन नहीं है। बालक अपनी रूचि के अनुसार किसी भी विषय को जितनी देर पढना चाहे पढे।शिक्षक को बालक के उचित कार्यों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। इस पद्धति में स्वाध्याय पर विशेष बल दिया जाता है।

6)बोध प्रणाली:

इस प्रणाली में पठन पाठन का विशेष महत्व है।। प्रारम्भिक स्तर पर बोध प्रणाली का अर्थ है- शिक्षा रूपी पठन-क्रिया में लगे और समान पठन की दृष्टि से पठन क्रिया के वस्तु बोध , प्रतिफल ज्ञान और कौशल में हो सके।किसी भी पाठ के केन्द्रीय भाव को ग्रहण करना बोध से सम्बन्धित है।

7) प्रश्नावली प्रणाली:

 इस प्रणाली के माध्यम से बच्चों में गुणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास होता है । हरबर्ट स्पेंसर के अनुसार,' अगर कठिन से कठिन विषय को भी सामान्य रूप से प्रश्नोत्तर के माध्यम से बच्चों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तो वे उन्हें सहजता से से समझ जाते हैं।

8) अभ्यास प्रणाली:

अभ्यास शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह प्रणाली मनोवैज्ञानिक शिक्षाशास्त्री 'इरिऔन' की देन है।निरन्तर अभ्यास एवं पुनरावृत्तियों के माध्यम से बच्चों के मनोभावों के अन्तर्गत सार्थक शब्दों के कोशों से भरा जा सकता है। कठिन शब्दों का सही उच्चारण, सही लेखन तभी सम्भव हो सकता है जब निरन्तर अभ्यास कराया जाता रहे।

9)यान्त्रिक प्रणाली:

यान्त्रिक प्रणाली को वैज्ञानिक प्रणाली भी माना जाता है।इस प्रणाली से प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च सभी वर्ग को छात्रों को लाभ मिलता है। इस प्रणाली के अन्तर्गत 'कम्प्यूटर शिक्षा' विद्यालय का एक आवश्यक अंग बनती जा रही है। यान्त्रिक प्रणाली की ही देन है कि आडियो, वीडियो कैसेट और काम्पैक्ट डिस्क आदि के माध्यम से भी आज विद्यालय में छात्रों को रोचक जानकारी दी जा रही है।

उपरोक्त कंटेंट का यूट्यूब वीडियो देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें।

https://youtu.be/h7k_0WiXRlk

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